Skip to main content

Featured

मन की गाँठें

मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...

जिंदगी

 मनु पता नही आप हमे पढ़ते हो भी के नही .. आजकल कहा हो क्या कर रहे कुछ भी नही पता बस बहुत ज्यादा याद आ रहे क्यों नही पता .. क्या तुम्हे सच में कभी याद न आई हमारी 😐

और हम देखो अब भी तुमसे उतना ही प्रेम करते है जितना उस वक्त करते थे !!

जिंदगी कभी तो लौट आओ देखो बैगैर तुम्हारे क्या हाल कर रखा है खुद का हमने ! जिंदा लाश बनकर रह गए है अंदर से खुद से भाग रहे एक साल से ! लगता की तुम एक बार पुकार लोगे अरु कैसी हो !!काश कभी ऐसा होता मनु की तुम कहते अरु हमे भी याद आती है तुम्हारी !!

बेवकूफ है जो तुम्हे इतना प्रेम करते है ! 


खुश रहना हमेशा !! 

Comments

Popular Posts