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मन की गाँठें

मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...

मैं और मेरी तन्हाई

जिंदगी हमेशा से मेरे लिए एक पहेली हैं। हर दिन कुछ नया लेकर आती है । मेरे लिए हमेशा से ही उसने जो भी था उसने छिन लिया है। हर बार मैंने उसे हंसते हुए सब कुछ दिया है। वो मुझे हमेशा खाली कर जाती है।
ओर तुने मेरे हसती हुई आंखों मैं हमेशा नमी ही दी है।
क्यु मुझसे इतनी नफरत है जिंदगी तुझे हर बार जब भी मैं खुद को संभाल ने की कोशिश करती हुं तु हर बार मुझमे खालीपन ओर तन्हाई से भर जाती हो।
और मुझसे कहती हो लो फिर एक बार तुझसे जीत गयी हूं।
पर अब मैंने इसी तन्हाई से दोस्ती कर ली है। जहां भी जाती हुं मेरी तन्हाई ने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा।
अब तो ना तुझसे हारने का गम है ना ही जितने की चाहत।
वैसे भी अब मेरे पास कुछ भी नहीं है तुझे देने के लिए
ना कोई अपना है और ना ही कोई सपना है।
है तो बस मैं और मेरी तन्हाई । अकेले तन्हाई के साथ  हर दिन आता है और वैसे ही तन्हा चला जाता है।
मेरे अपना तो कभी कोई था ही नहीं और मेरे सपने थे उन्हें तुने मुझसे छीन लिया ।
अब तो लडते लडते थक गयी हूं ए जिंदगी तुझसे
बस कर रोज रोज तु मेरा तमाशा ना बनाया कर,.... तुझे​ भी इजाजत है छोड़ दे तु मेरा साथ ओरो की तरह।
अब तो बस इंतजार है कि अब मौत आएगी ओर मुझे अपने साथ ले जाएं।
तब तो शायद मैं तुझसे जीत जाऊंगी ।

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