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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

मेरी कहानी.....

☆☆मेरी एक  कहानी ☆☆
☆☆ सुनो मेरी ही जुबानी ☆☆

☆☆बहुत खुश हूँ मैं फिर भी ☆☆
☆☆बहता है आँखो से पानी ☆☆

☆☆उदासी ओढ़े  और अकेला हूँ ☆☆
☆☆ पर चेहरा है नूरानी ☆☆

☆☆दिल मे ढेरो जख्मों को सहेजे☆☆
☆☆खुशिया बाटता हूं ☆☆

☆☆गर कोई हो उदास तो☆☆
☆☆ उसके लबों पर हंसी लाता हूं ☆☆

☆☆मेरी चाहत है बस यही ☆☆
☆☆बस अपनो का मिले प्यार ☆☆

☆☆मेरी किस्मत में नहीं था☆☆
☆☆ये मेरे नसीब की मेहरबानी ☆☆

☆☆बहुत कुछ पाया है☆☆
☆☆ तो खोया भी बहुत कुछ है ☆☆

☆☆बस गमों और दर्दो में अक्सर ☆☆
☆☆बहता आंखो से थोड़ा पानी ☆☆

☆☆लाख मिटा लूं अपने जख्मों को पर☆☆
☆☆बीते दिनों की रह जाती है निशानी☆☆☆

Comments

  1. लाख मिटा लूं अपने जख्मों को पर
    बीते दिनों की रह जाती है निशानी. ✍️💕❤️

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