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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Holi.....!!

सुनो, होली आ रही है...तुम भी आ जाना मुझसे मिलने ,रंग लिए ढ़ेर सारे..!!

मैं ना करू.. तो भी रंग देना मुझे सात रंगो से...वो सुर्ख लाल रंग ,तुम मेरे चेहरे के नूर को थोडा और बढ़ा देना..!!

लाओगे जो वो रंग गुलाबी...सुनो चुपचाप मेरे गालों पर लगा देना....जो शर्म से नज़रे झुक जाएँ मेरी ...तुम हौले से कोई प्रेम गीत गुनगुना देना..!!

छन छन करके गूंजेगी हर दिशा में प्रीत अपनी...तुम वो चमकीला रंग मेरे पैरों में सजा देना..!!

ख्वाब हूँ मैं तुम्हारा ...ये सच ,मुझे तुम बता देना...और वो सुनहरा रंग फिर मेरे सपनो पर उड़ा देना..!!

आना तो ऐसे आना...मुझपर इश्क का बेसुमार रंग चढ़ा जाना..... सुन भी लो अपने दिल की बात... होली आ रही है...तुम भी मुझसे मिलने आ जाना..!!

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