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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Aurat...

मुझे तलाश है उन औरतों की जो कभी श्रृंगार नहीं करती। जिन्होंने आईने को निगाह भर के नहीं देखा। जिन पर संगीत का कोई प्रभाव ना पड़ता हो। कविताएं और कहानियाँ जिनके आस पास भटक नहीं पाई।
मुझे तलाश है उन औरतों की जिन्होंने अपनी चौखटों पे बरसों बरस पहरा दिया हो ताकि इंतज़ार नाम का जानवर अंदर घुस कर उसके अस्तित्व को तहस नहस न कर दे।

वो औरतें जो धूप में बैठकर अपने आप को उस कपड़े की तरह बना चुकी है जिनकी सख्त सिलवटों को खोलकर उन्हें तह करना मुश्किल हो।

वो खाली कुँए सी बाँझ औरतें जिनकी कोख से कभी याचनाएँ जन्म नहीं ले पायी।

मैं उन्हें खोजकर उनसे कहना चाहती हूँ
की मुझे ईर्ष्या है तुमसे। क्योंकि तुमने बरकरार रख्खा प्यास की गरिमा को।

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