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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Thirteen minutes.....

क्या तुम्हें याद है आख़िरी बार जब हम मिले थे ?
तुम मुझ से कुछ मिनट पहले पहुँच गयी थी,
मैं शायद कहीं काम में फँसा था वरना हर बार तुमसे पहले पहुँच जाता था,
न सिर्फ़ पहले पहुँचता..तुम्हारे लेट होने पर ग़ुस्सा भी करता,तुम्हें भी आज मौक़ा मिला था बदला लेने का,
जब मैं पहुँचा तो ग़ुस्सा थी तुम,मुझे याद नहीं मैंने तुम्हें मनाया कैसे,बस याद है तो तुम्हें आख़िरी बार देखना,याद है तो मेट्रो के बंद होते दरवाज़े,
तुम्हें याद है तुमने कहा था पूरे 13 मिनट लेट आये हो तुम आज...अब अगली बार मैं भी 13 मिनट लेट आऊँगी और तुम ग़ुस्सा नहीं करोगे ये 13 मिनट उधार है मेरे तुम पर।
पर मैं कहां जानता था कि वह अगली बार कभी आएगा ही नहीं,हमें दोनों को ही मालूम नहीं था ये मुलाक़ात आख़री होगी,तुम्हारे 13 मिनट आज भी उधार है मुझ पर,कभी फ़ुरसत मिले तो आना।
वही हूँ मैं तो आज भी,वहीं खड़ा हूँ उसी मेट्रो स्टेशन पर...इंतज़ार कर रहा हूँ तुम्हारा॥
काश़ मुझे पता होता वो मुलाक़ात आख़री होगी,,बहुत कुछ कहना था तुम से,मुझे आख़िरी बाहर आँखों ही आँखों से अपनी मोहब्बत का इज़हार करना था,मुझे तुम्हें परेशान करती गाल पर भटक रही बालों की उस लट को आख़िरी बार अपनी उंगली से रास्ता दिखाना था।
कभी फ़ुरसत मिले तो आना ज़रूर 13 मिनट ले जाना अपने।

#13min
हा याद है मुझे जब तुम आए थे और मैं गुस्से में थी ...तुम पूरे १३ मिनिट लेट थे और फिर हमने तुमसे मिन्नते करवाई थी हमे मनाने के लिए ।
पता है कितना अच्छा लग रहा था तुम्हारा यूं मनाना..!!
एक पल के लिए मन हुआ बस यही ठहर जाए ये लम्हे ...कितना कुछ कहना चाहते थे हम तुमसे वो सब कुछ जो मेरे दिल की बात हर
बार  होटों तक आके रुक जाती थी ...कितना कुछ अनकहा रह गया है जो मुझे तुमसे कहना है ..

सुनो, मुझे तुमसे कहने है
कुछ शब्द, कुछ बातें ,जिनमें सारे जज्बात है
 जो बस शुरू भी तुम से हुए हैं और खत्म भी तुम पर होते हैं ...
सुनो,
हम मिलेंगे फिर एक बार और
हा वो १४ मिनिट याद रखना जो मेरे उधार है तुम पर .....!!

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