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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Marriage...

भारत में लड़कियों की शादियाँ नहीं होतीं
वो सुपुर्द कर दी जाती हैं एक नर को
ठीक उसी तरह जैसे बिना देखे,उलटे रखे
ताश के पत्तों पर दांव लगा दिया जाता है

और शादी के अगले ही दिन वो शोख लड़कियाँ
तब्दील हो जाती हैं ज़िम्मेदार औरतों में जो अपने सुहागन होने की तमाम निशानियाँ ओढ़े सुबह से शाम तक चिपक जाती हैं हर घड़ी
एक नयी ज़िम्मेदारी से..

माँ के घर में बेतकल्लुफी से कहीं भी फ़ैल जाने वाली वो लड़कीध्यान रखती है कि कहीं छः न बज जाएँ नहीं तो एक और उलाहना जुड़ जाएगा उसकी रोज़मर्रा की जिंदगी में ..
अभी तो वैसे ही बहुत हिसाब देना है कि बाप के यहाँ से क्या सीख आई है और ये ताने वही औरतें उछालती हैं, जो कल तक लड़कियाँ थीं.. किसी और घर की या फिर वो लड़कियाँ जो औरत बन जायेंगी किसी और घर में हाँ, कुछ नर सुघड़ होते हैं और बहुत बेहतर भी ठीक उन ताश की बाजियों की तरह जो आप जीत जाते हैं

पर उनकी ये अच्छाई भी अहसान होती है उस औरत पर जो अभी भी अपने अन्दर उस लड़की को जिलाए हुए है

जो मायके से चलकर साथ आई थी..!!


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