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मन की गाँठें

मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...

My Love...

मै हमेशा सोचती थी कि अगर कभी किसी दिन तुम मुझसे पूछोगे की मुझे तुमसे कितना प्रेम है तो मैं जोर से खिलखिला कर अपनी दोनों बाहें हवा में फैलाकर कहूंगी इतना सारा !!

बचपन मे मुझसे जब मां पूछती थी कि मैं कितना लड्डू खाऊँगी या जब बाबा मुझसे पूछते की रात में कितने सपने देखे तो मैं यू ही अपने दोनों हाथों को हवा में फैलाकर कहती इतने सारे..!!

घर  से सालो दूर रहने के बाद जब माँ पूछती, याद नही आती माँ की न ? बोल कितना मिस किया मुझे तब भी मैं इसी प्रकार खिलखिलाकर  उनसे जोर से लिपट कर कहती इतना सारा... !!

मैं आज भी वही करती हूं..!!

मेरे लिए हाथो को हवा में फैलाकर इतना सारा कहना कोई बचपना नही है..!
मेरे लिए इसका मतलब है कि अगर इस पूरे ब्रम्हांड को भी मेरी खुली बाहों के सामने रख दिया जाए उस क्षण, तो वह भी मेरे इतना सारा के सामने छोटा पड़ जायेगा...!!

पर तुमने कभी मुझसे ये सवाल नही पूछा...!!

पता नहीं क्यों ??

मगर यदि कल कोई मुझसे ये सवाल करेगा तो शायद मैं उससे खिलखिलाकर इतना सारा नही कह पाऊंगी...!!

बल्कि उसके इस सवाल पर मेरी आँखों से आंसू गिर पड़ेंगे.!!

और उनमें से एक आंसू को मैं तुम्हारे हथेली पर रखूंगी और कहूंगी की यदि तुम गिन पाओ उस एक बूंद में छिपी वह सारी प्रार्थनाएं जो मैं भगवान से तुम्हारे लिए करती हूं ,

वह सारी मन्नते जो मैं तुम्हारे लिए मांगती हु, वह सारी पीड़ा जो मैं हंस कर सह लेती हूं मैं तुम्हारे लिए, वह सारे सपने जो मैं बस देखती हूं तुम्हारे लिए ,यदि कर पाए वह इन सब बातों का आंकलन तो मिल जाएगा उसे उसका उत्तर..!!

मैं खुद नही जानती की तुम्हारे प्रति

मेरा प्रेम कितना असीम है...!!

मगर कल को अगर भगवान ने अपने एक तराजू के एक पलड़े में  रखा जाए मेरे आंसू की वह एक बूंद तो मुझे पूरा यकीन है कि मेरा प्रेम जीतेगा , भारी पड़ेगा भगवान के ब्रम्हाड पर जो मैं अब तक न्योछावर कर चुकी हूं...

तुम पर....

हां सिर्फ तुम पर...!!


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