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 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Purani Baat...

हर शाम मन का तुम्हारे फोन का इंतजार
पुरानी बात हो गयी...

वो चिड़ियों का लौटना,दीपों का जलना
नदियों का थमना ,वो कोयल का कुहू कुहू करना,अपने सौंदर्य पे पेड़ों का इतराना भी पुरानी बात हो गयी,

अरे ...!!
देखो न इधर मंदिर की घंटी बजी याद है ना जब भी बात करते थे तो मंदिर में घंटी बजती थीं
क्या नया है ?...ये बातें भी तो पुरानी बात हो गयी...!!

लुढ़क जाता है सूरज रोज़ इसी आकाश में कहीं
कौन सी शराब है ये किसी ने पूछा है कभी ?
ख़ैर छोड़ो बहुत पूछने पर बात नज़रंदाज़ हो गयी पल भर की ख़ुमारी भी पुरानी बात हो गयी...

अब शाम हुई तो क्या हुआ !... इसका होना
भी पुरानी बात हो गयी...पर कुछ है जो पुराना नहीं हुआ...
कुछ है जो वैसा है जैसा तुमने छोड़ा था या जैसा अभी होना है कुछ है जो मैंने संभाल रखा है...

तुम्हारे लिए...तुम्हारा प्यार , तुम्हारा इंतज़ार ,
हम दोनों का एक दूसरे को परस्पर आँखों से स्नेहिल स्पर्श ...

तुम्हारे फोन आने से पूर्व का हर्ष...
तुम्हारे मेरे साथ की डोर से बंधी वो पुरानी शामें... आज भी वैसी नई हैं..

हाँ उनका नया होना ..

पुरानी बात हो गयी..!!




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