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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Sky ...

आकाश जाने कहाँ तक फैला है ...
मुझे क्या पता पर अपनी नज़रों के क्षेत्रफल जितने बड़े आकाश में एक बड़ा सा प्लाट मेरा है..

धरती की कुछ उलझने मिलने आयी थीं न.. उन्होंने ही कल्पना को तोहफ़े में दिया था ..मैंने वहाँ एक पेड़ भी लगाया है .. उस पर लगे दोनों फल जैसे कभी पकते ही नहीं ...
एक दिखता है जब आकाश नीला होता है ... एक आकाश के काले होने पर ..दोनों ने अपनी सहूलियतों के अनुसार रंग चुन लिए हैं ..!

क्या पता इन दोनों की आपस मे कोई दुश्मनी हो पर नीले वाले में अकड़ ज़्यादा है तुम्हारी तरह

क्योंकि वो कभी काले आकाश में नहीं आता
पर काले वाले को मैं रोज़ ही थोड़ी देर के लिए नीले आकाश में पाती हूं ...वैसे तुम्हें नहीं लगता दोनों ही बहुत इंसानी हो रहे हैं ...

(आकाश तुम्हारा ख़्याल है , काले आकाश वाली मै ... और शायद “ आजकल ” नीले आकाश वाले तुम ...)


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