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मन की गाँठें

मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...

इंतजार ...

मैं तुम्हारे इंतज़ार को जानती तक नहीं थी पर
उसने मेरे कहने पर ही दोस्ती के हाथ आगे बढ़ाए थे .. पलट के फिर पढ़ने की ज़रूरत नहीं थी...
हाँ तुमने ठीक पढ़ा  “ मेरे ही कहने पर ही.. ”
पर मैंने इसलिए कहा क्योंकि मुझे लगा कि वो मुझसे दोस्ती करना चाहता है ..और मैं जानती थी कि तुम्हारे दिल की तुम्हारे इंतज़ार से दोस्ती बहोत गहरी है .. और तुम्हारे दिल से मेरे दिल की दोस्ती न टूटे इसलिए मैंने तुम्हारे इंतजार को दोस्त बना लिया..
 और तुम्हारा इंतज़ार..! अरे देखो वो इतना अच्छा दोस्ताना स्वभाव का होगा मुझे बिल्कुल नही लगता था ..देखो ना जब से मुझसे मिला है इसकी दोस्ती मेरी आँखों हो गयी हैं..और आँखे बता रहीं थी कि ये आजकल तुम्हारा इंतजार दिल के भी काफ़ी क़रीब हो रहा है ..
सच में अगर मुझे पता होता कि ये ऐसा है तो शायद ..शायद मैं इसे नहीं कहती कि दोस्ती का हाथ बढ़ाओ..पर फिर मैं और क्या करती ?
ये मैं कभी सोच ही नहीं पाई क्यूंकि मैंने जब भी तुम्हारे इंतज़ार को बाहर भेजा है उसके जाते ही हर बार तड़प मुझसे मिलने आ जाती थी ..

सच ! आज भी नहीं सोच पाती हूं कि मुझे तुम्हारे इंतजार से दोस्ती करनी थी या नहीं..और अब ...अब चीज़ें हाथ से बाहर हैं ,
तुम्हारा यही इंतज़ार जो कभी मुझे बेचैन कर देता था आजकल सुकूँ देता है .. और अब हालात कुछ ऐसे बन गये हैं की मेरे दिल की दोस्ती तुम्हारे दिल से ज़्यादा गहरी

तुम्हारे इंतज़ार से है...!!

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