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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Addiction of love ..

नशे की तरफ़ वो क्या देखता जाम की हर बूँद उसे चूमने से मिल रही थी...पैमाने की तरफ़ उसकी नज़र ही नहीं उठी जब होटों से होंठ छूने लगें तो बातें अनकही चुपचाप होती रहीं,देह पर जब उसकी उंगलियों ने छुआ उसकी देह पर रात-भर चित्रकारी चलती रही,उस चांद की छाया में फिर चाँदनी उनकी नज़रों में घुलती रही,प्रेम का इत्र जब उस हवा में घुला दोनों उससे महकते रहे...
चढ़ा नशा यू मुहब्बत का वो उसका जहर पिती रही ... की वो घुल गया उसमे ऐसे जैसे कोई जहर घुलता रहा ... वो जहर यूं चढ़ा उसमे की वो उसमे मरती रही.. नशे की तरफ क्या देखता वो  जब मुहब्बत का नशा यू चढ़ता रहा..ये नशा यूं चढ़ा दोनों पर की देह की पिंजरे से निकल कर

रूह से रूह  मिलन को आतुर रही ...!!

( शिव तुम्हारा जहर नस नस में भर गया है ) 

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