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Embracing the Calm: The Quiet Power of Being Your Own Backup

  I’m at the calmest point in my life right now. I don’t react to every little thing. I’m not jumping into drama, chasing validation, or waiting for someone to show up. I’m simply staying in my own lane, getting my life together, and genuinely vibing with myself. For the first time, I’m learning what it truly means to be there for me. This season feels different. It’s not loud or flashy. It’s peaceful, intentional, and deeply personal. And if you’re in it too, you know exactly what I’m talking about. The Difference Between Having People and Knowing People It’s during the difficult times that the illusion shatters. You quickly learn the difference between people who are there for you and people who were just around you. The ones who disappear when your life gets heavy. The ones who only reach out when they need something. The fair-weather connections that feel warm until the storm hits. That realization used to hurt. Now? It feels like freedom. Because once you see it clearly, you ...

कुछ अनकही बातें...

जानते हो शिव इन दिनों में एक अजीब सी कश्मकश से गुजर रही हूं आपके लिये मेरा प्रेम कभी-कभी मेरी समझ से परे है..इन दिनों दिल और दिमाग के बीच एक द्वंद अनवरत चलता रहता है, आपके जाने के बाद जो आपकी आवाज मेरे मन में सुनाई देती है उससे दूर जाने का मन करता है लगता है मन के कान बंद कर इसे बिलकुल भी ना सुनूँ..तो कभी मन करता है कि संसार की सारी ध्वनियाँ मौन हो जाएँ,
और आपकी बातें मन्दिर की घण्टियों और कुरान की आयतों की तरह सदैव गुंजायमान रहें और में उनको जन्मों तक सुनती रहूं.. कभी-कभी मै घंटो आपकी चंचलता से भरा मुख वाली मुस्कुराती तस्वीर देखती रहती हूं ...ऊ हू बात नहीं करते अब हम आपकी तस्वीर से क्यूंकि आजकल वो भी आपकी तरह ही हो गई है...
तो कभी मन करता है कि आप सामने हो और हम आपसे लड़ लेे इत्ता सारा ऐसे कैसे चले गए आप अपनी अरु को छोड़ कर पर नहीं कहेंगे आपसे कुछ हम मुझसे दूर जाना आपने ही तो चुना है आपको आपका प्रेम आपकी जिंदगी जो मिल गई ..

कभी-कभी मन करता है अब कभी ना कहूँगी आपसे हृदय की व्यथा एवं दशा,तो कभी मन करता है कि मन की सारी किताबें, आपको बिना शब्दों के लिखे गए पत्र खोल के रख दूँ आपके सम्मुख..

आपके प्रेम में मैंने गिरना नहीं(I didn't fall in love with you), अपितु उठना सीखा है(I rose in love with you), विचारों की संकीर्णता से ऊपर,पाने-खोने के निरन्तर चलते द्वंद से ऊपर,आप प्रेम बन मेरी जीवन-सरिता के परस्पर चल रहे हो,

आप विश्वास हो मेरा, मेरे इष्ट के प्रति,कि उन्होंने आपको जीवन में यूँहीं आने और आ कर जाने के लिए नहीं भेजा है,अपितु आपको हेतु बना कर भेजा है मेरी अपूर्ण व सम्पूर्ण रचनाओं का ....

आप मेरे जीवन की सार्थकता का एक वाक्यांश हो,
आपके प्रति मेरा प्रेम मात्र एक लड़की का एक लड़के के प्रति होने वाले प्रेम का दर्पण नहीं है अपितु प्रति-पल ईश्वर के निकटस्थ होने का विश्वास है..!!

 शिव आप मेरे जीवन के उद्देश्य या मेरी मंज़िल नहीं हो कि आप तक पहुँच कर मेरी जीवन-यात्रा समाप्त हो जाएगी...नहीं...पर आप ही तो मेरी यात्रा हो, वो यात्रा जिसे तय कर रही हूँ मैं श्वासों के पैरों से...

आज बहुत कुछ कह दिया आपसे है ना कहते-कहते...शायद बहुत कुछ हां अब आप स्वयं को ईश्वर मत समझ बैठना, आप बस मेरे साथी रहना, इस लोक से उस लोक के बीच की यात्रा के सहयात्री रहना..

आपको भेज रही हूँ अनन्तता से परिपूर्ण प्रेम इस छोटे से खत में प्रेम की गाँठ लगा कर, मेरे शिव आप सदैव प्रेम बने रहो,बस ईश्वर से यही अंतिम प्रार्थना है,

आप जहाँ भी रहें जिसके साथ भी रहो ईश्वर आप पर सदा स्नेहपूर्ण दृष्टि बनाएं रखें...

मेरे प्रेम को मेरा अनंत प्रेम...!!

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