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Journey ...
मै अब थक गई हूं इस जीवन यात्रा के सफ़र से , इस यात्रा की मंजिल कभी मैंने तुम्हे माना था..
मेरे इस जीवन यात्रा के बीच की छोटी-छोटी उप-यात्राओं में जब भी खोई हूं मैंने हमेशा चाहा की काश तुम ईश्वर सरीखे मेरे मार्गदर्शक बन खड़े होते
या सहयात्री की भाँति कभी साथ चल लेते थोड़ी दूर ही सही पर शायद अब ये अब नहीं हो सकता मुझे अपनी यात्रा अब अकेले ही तय करनी होगी .. हां आज भी मेरी मंजिल तुम्हारा प्रेम ही है पर वो प्रेम अब इंतज़ार में तब्दील हो गया है ..
तुम्हे पता है यूँहीं कई सारी अदृश्य सड़कें जो सिर्फ मेरे सपनों में है अपनी इति पर पहुँच जाती हैं और मेरी वो सारी तुम तक पहुंचने की उपयात्राएँ सम्पूर्ण होती जाती हैं..
पर एक यात्रा जो कभी पूरी नहीं होती वह है मुझ से तुम तक की अंतिम यात्रा.. हां जब मै कभी इस यात्रा को पूर्ण कर लूंगी तो वो मेरा तुममें विलय हो चुका होगा शायद ..
या शायद मै इस संसार में यूंही भटकती रह जाऊंगी तुम तक की पहुंच ने कि यात्रा में ..
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