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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

कुछ अनकही बातें ...

 बहुत गुस्सा आता हैं ,जब कोई भी आपको न समझें,कही कोई ठीक रास्ता न दिखे... जब आप समंदर और रेत के बीच का फर्क भी न समझ पा रहे हो, आपके सामने अंधकार ही हो बस,उजाले के नाम पे कोई एक आशा की किरण, एक लौ कुछ भी बाकी न रह गयी हो...! आपको सिर्फ निराशा हाथ लगे..

बारिश के पानी में जो चमकती बिजली होती है न वो भी पल भर को उजाला देती हैं ,एक क्षणिक प्रकाश देती हैं जिससे एक छोटी सी आशा और उम्मीद बारिश में अकेले चलते हुए को मिलती रहती हैं,

लेकिन कुछ क्षण जीवन में ऐसे आते है जिसकी वजह से आप चाहकर भी अपनी पूरी कोशिश करते हुए भी उस उजाले को अपने साथ कायम रखनें में असफल होते हैं...इस सच्चाई को मैं आप और हम सभी जानते हैं लेकिन अपने मन की न सुनते हुए हम उसके बारें में सोचने और उसे स्वीकारने से डरते हैं, 


कुछ बातों का सामना न कर पाना हमारी 

कुछ खास कमजोरियों में से एक होता हैं..!!

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