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मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...
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Unsaid Words
कभी कभी लगता है कि थोड़ी दूरी भी बहुत ज्यादा दूरी होती है....फ़िर लगता है कि दूरी तो दूरी है उसमें थोड़ी और ज्यादा की कोई गुंजाइश नही होती..मन कहता है कि आप बस यहीं हो मैं हाथ बढ़ा कर आपको छूना चाहती हूँ पर मेरे हाथ आप तक नही पहुँच पाते..आप ना बहुत दूर से लगते हो जैसे मैं आप तक कभी पहुँच ही नही पाऊ..हमारे बीच एक खाई सी हो गई है जिसे पार नही किया जा सकता, पर मैंने फ़िर भी हार नही मानी है.. सोचती हूं यूंही चलती रहूंगी तो एक दिन आप तक पहुंच ही जाऊंगी..हां कभी मन होता है आपसे कहने का आप कुछ दूरी तक चलकर क्यों नहीं आते तो शायद हम दोनों की बीच की ये दूरी थोड़ी कम हो जाए .. पर आप शायद मुझ तक आना नहीं चाहते पता नहीं ..कभी लगता है काश कोई पुल होता हम दोनों को जोड़ पाता...
हां..कुछ दूरियाँ इतनी दूर होती हैं कि
कभी तय नही हो पाती..!!
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