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Soulmates

 She was his darkness, mysterious and intense,  the kind that teaches the stars how to shine.  He was her light, gentle and patient, never blinding, only guiding her home. Together they were twilight ,  where shadows kiss the dawn.  Her storms found shelter  in the warmth of his calm.  She stood with him like rock,  unyielding through storms,  her silence a fortress,  her love keeping him warm.  He carried her shadows,  she guarded his flame,  Together they wrote  an unbreakable name.  And in their union,  the universe knew Darkness and light  were always meant to be two.  Not opposites,  but building dreams together!!

Rape...

 बलात्कार .. जब भुक मिटाने के लिए रोटी का नहीं किसी शरीर का इस्तेमाल किया जाए .. ये एक विकृत्कता है..

एक लड़की जिसका बलात्कार हो चुका है, वह अपनी डायरी में एक लंबे अरसे के बाद लिखती है :-

उस दिन में खुश थी बहुत अपने सहेलि के यहां जा रही थी और अचानक ऐसा कुछ हुआ जिससे मेरे रूह तक को जकजोर दिया क्या गलती थी मेरी..क्या खुले विचारो का होना रात को बाहर निकालना पाप है .. पता है, लिखा करती थी मैं.. लिखना रास आता था मुझे ..उस रात की उस घटना के बाद मेरे शरीर में अब सिहरन दौड़ा करती है.. अपनी कक्षा के लड़कों से अच्छी दोस्ती थी मेरी, पर अब उनको देखकर भी सहम जाती हूं। में जब कॉरिडोर से निकलती हूं न, तो स्टूडेंट्स कहते हैं - "यह वही है न, जिसका रेप हुआ था.. मां ने कहा इससे दूर रहना.." ऐसी घृणास्पद बातें सुनकर ही मैंने सबसे दूर रहने का मन बना लिया था.. अब मेरी कलम भी ठिठुरती है। मानो शब्दों का भी बलात्कार हुआ हो। शब्द निकलते नहीं है...जब भी कोर्ट में पेशी होती है और मुझसे दर्जनों सवाल किए जाते हैं, उन सभी पलों में मेरा फिर से रेप होता है.. मैं अब हर पल मरती हूं..! 


ये ऐसी घटनाएं है जो हमारे लिए अाई गई हो जाती हैं वो किसी के जीवन का मोड़ बन जाती हैं..एक ऐसा मोड़ जिससे या तो जिंदगी किसी के शाप बन जाती है आज भी जिसका बलात्कार हुआ है उन्हें समाज में स्वीकारा नहीं जाता .. और ये वो घाव होते है जो शरीर पर नहीं आत्मा पर लगे होते कभी ना भरने वाले .. किसी भी स्त्री या पुरुष के साथ हुई ऐसी घटना के बारे में उसके सामने ज़िक्र न करें अपनी सांत्वना न दें..उन्हें सांत्वना की ज़रूरत नहीं है, उन्हें ज़रूरत है कि समाज उन्हें समझे..

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और रही बात बलात्कारी की, तो वो तो छूट ही जाते हैं। हम उस भारत के वासी थे "जहां नारी के लिए लंका का दहन कर दिया गया था, पर अत्याचार न सहा गया था" हम उस भारत के वासी थे जहां महाभारत हुई थी सिर्फ एक स्त्री के आत्म सम्मान के लिए। और हम अब उस भारत में रहते हैं, जहां एक बलात्कारी रेप कर जाता है, पर उसे सज़ा नहीं मिलती। सज़ा तो दूर की बात, उसको सज़ा मिलने का भय भी नहीं होता। वह हंसता, खुश रहता हुआ अपना सिर ऊंचा किए समाज में चलता है। और पीड़िता, पीड़िता की आंखें नीची हो जाती हैं, उसकी हंसी, उसकी खुशी, उसके जीवन का बलात्कार होता है..हम अब उस भारत में रहते है जहां ऐसी घटनाओं पर सिर्फ कविताएं लिखी जाती हैं बड़े बड़े भाषण दिए जाते है .. और सोशल मीडिया का तो कहना ही क्या .. यहाँ पर बात ये है कि हम भीतर से इतने विकृत हो चुके हैं,कि अब यह सब सुनना भी हमे कुछ असाधारण नहीं लगता..उल्टा इस तरह की बातों को प्रोत्साहन देकर हम उनको इंटरनेट की दुनिया का वो शक्तिमान बना देते हैं जो स्क्रीन के उस तरफ बैठ के तथाकथित(so called)"गलत चीज़ों" को सुधारने का बीड़ा लेगा..अब कोई पूछे कैसे?अपने लिंग का हथियार बना के,और योनियों को निशाना बना के..यही तो हैं वो रक्षक,जिनका हम बरसों से इंतज़ार कर रहे थे..! 

विडंबना है न..! समाज में विडम्बनाएं बहुत हैं..! 

मन में एक ख़्याल आता है कि भारत में इतने बलात्कार होते हैं लेकिन क्या आज तक कोई माँ, बहन या बीवी किसी बलात्कारी को क़ानून के हवाले की है क्या? क्या किसी भी माँ को कभी भी पता नहीं चलता कि उसका बेटा बलात्कार करके आया है?

इल्तज़ा है एक! मानिएगा? अबकी बार मोमबत्ती मत जलाना, उस बलात्कारी को जला देना..!

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