Skip to main content

Featured

मन की गाँठें

मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...

You

शिव कल फिर से पता नहीं मेरे दिल का आसमा तुम्हारी यादों से भर गया , ( और मुझे ये भी पता है तुम मुझे इन दो महीनों में भूल चुके हो तुमने अपनी एक नई जिंदगी नई दुनियां बसा ली है किसी और के साथ ) पता नहीं ये दिल बहुत बैचेन था बहुत ही, शिव बस आपकी आवाज सुनने का मन हो रहा था .. क्या करती आप इतने दूर जा चुके हो मैं चाहकर भी आपको पुकार नहीं सकती , रिश्ते का ये मोड़ जहां आप चाहकर भी नहीं पूछ सकते कैसे हो बहुत ही भयावह होता है ... तुम्हें पता है बातें न कह पाने का बोझ ⁣शायद सबसे भारी होता है,⁣दिखता नहीं, आभासी होता हैं आजकल मै तुम्हारी तस्वीर से भी बात नहीं करती क्यूंकि तुम्हारी वो मुस्कुराती हुई तस्वीर अब मुझे रुला देती है .. बिलकुल तुम्हारी यादों की तरह..!

इसलिये, कभी कभी मै जब कह ना पाने की ख़ामोशी से भर जाती हूं तब ख़ुद से ही⁣ बातें साझा कर लेती हूँ तुम्हें पता है दिल हल्का होकर कहता है⁣..

बातें कभी गुप्त नहीं होती...!!

Comments

Popular Posts