Skip to main content

Featured

Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

आप ..❣️❣️

 शिव पता है आज ऑफिस से आते वक्त हमे चूड़ीवाला दिखा , उन्हे देखकर ना पता नहीं क्यों दिल से आवाज निकल आई.. शिव क्या हम ये चूड़ियां ले ले .. और फिर बस यूं चूड़ियों की तरफ देखकर यूंही मुस्कुराते हुए निकल आए घर .. शिव कितना पागल है ना दिल मेरा सोच रहा था कि आप होते तो क्या कहते .. पता नहीं अब हमने खुद से खुद को जवाब दे ना भी बन्द कर दिया है .. पहले कर लेती थी यूंही आपसे बाते .. अब ना वो मेरे पगले खयाल और पगले सवाल अनकहे रहने देती हूं .. नहीं अब मै कह पाती खुद से कि आप होते तो क्या कहते ? 

कभी कभी यूंही लगता है कि आप मेरे पास हो फिर आप जब भी हमसे मिलकर जाने की बात करते हो ..पूछ लेती हूं जा रहे हो क्या आप इतनी जल्दी ?और आप हमे बिना देखे कहते हो हां अरू कितनी देर हो गई अब जाने दो ( पता है शिव तब मन करता है ये वक्त ना बस ठहर जाए )

और आप दरवाजा बंद कर निकल जाते हो शिव 

तब ऐसा महसूस हुआ कि मेरी सांसे मानो थम सी गई हों...हलक में मानो कुछ अटक सा गया हो. .

और ...आंखें आंसुओं से भीग गई और फिर अगले ही पल...दरवाजा खोलकर जनाब वहीं शरारती मुस्कान लिए सामने खड़े थे.. वहीं आपकी हसती हुई आंखे .. और हम शिव आपको ऐसे ही देखते रह गए क्या कहते आंखों में आंसू और चेहरे पर ख़ुशी दोनों एकसाथ थी मेरे , और आप धीरे से पास आकर कहते हो अरु अरे मैं तो ..मजाक कर रहा था .. (पता है शिव आपको ना उस वक्त मन कर रहा था पीट दे ऐसा मजाक कोई करता है क्या अपनी अरु को छोड़कर जाने का शिव आप ना हमे हमारे खयालों में भी तंग करते हो .. क्या कहूं )

ये दो पल  की आपके आने और जाने की

अवधि ही शायद...बिछड़ने और मिलने की स्थिति 

खुशी और दर्द का एहसास दे जाती है 

और ...पता है हमे 

प्रेम की परिभाषा सीखा जाती है ..

शिव पता सोचती हूं काश ये मेरे वाहियात से खयाल कभी सच हो जाए तो ? क्या कहूं ? कुछ नहीं मेरे पास इन खयालों के अलावा कुछ भी नहीं ..

 बस हम हर बार मिल लेते है आपसे यूंही

 I love you शिव हमेशा खुश रहना ..

Comments

Popular Posts