Featured
मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...
- Get link
- X
- Other Apps
Jindagi
लौट जाती है रात हमारे दरवाज़ों से ख़ालीमन किसने नहीं सुनी उसकी खामोशी
डूबता सूरज टकटकी लगाए हमारी खिड़की पर देता रहा दस्तक ..किसीने नही सूना उसका ख़ालीपन ..फूल मुरझा गए किताबों में दबे पड़े..किसीने नहीं सूनी दास्ताँ उनकी..टूटते हुए तारों क़ो भी कहना था शायद बहुत कुछ..किसी ने नहीं सुना उनको भी सबने बस अपनी ही कहीं ..नहीं सूनी किसीने मुँडेर पर आयीं चिड़ियाँ की ..नहीं सूना किसीने नदियों क़ा संगीत ..
नदीयाँ सुनाती रहीं अपने मिलन क़े गीत .. क़िसी ने जवाब में हाथ नहीं हिलाया ऊन बादलों क़ो ज़ब वो आये थे आंसमा क़ा प्रेम लेक़र ..समंदर रोज़ किनारे पर आकर रोज़ ढूँढता है जा चूके प्रेमी क़े पैरों क़े निशान ..सुनाती है लहरे भी दूर गए प्रेमी की कहानी क़ोई..
कितना कुछ कहाँ गया हमसे ..!!
हम सुनते कहाँ है?
Popular Posts
Some Decisions Don’t Have Logic They’re Just Destiny
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment