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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

SHIV

 पता है शिव आज मन हो रहा था गले लगा लू कितनी बार सोचती हूं आपको भूल जाने का पर मेरा प्रेम मुझे इसकी इजाजत नहीं देता ...शायद मेरे हिस्से में ईश्वर प्रेम लिखना भूल गए आपका वो हमे यूं बिखेर कर चला जाना बहुत अखरता है शिव .. मैं चुप चाप ताकती रहती हूं ,उस चांद को ,उस आसमान लो,उस पंखे को ,दीवारों पर रात के अंधेरे में बनाती रहती हूं उंगलियों से आपकी तस्वीर वहीं मुस्कुराते हुए आप..

जानते हो शिव आजकल जब भी मन करता है आपको गले लगाने के आपकी उस तस्वीर को गले लगाती हूं और महसूस करती हूं आपको और आपके स्पर्श को...भीग जाती हूं आंसुओं की बूंदों की बारिश में ,

आपको देखने को , आपसे मुलाक़ात को तड़पता हुआ ये मन बैचेन हो जाता है 

शिव आप बिल्कुल उस बारिश की तरह हो जिसके बरसने से मेरे मन की 

जेठ दुपहरी में तपती धरती तृप्त हो जाएगी ...! 


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