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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Memories of banaras

आज हमारे बनारस यात्रा का आखरी दिन था और हमने अपने सफर का आखरी पड़ाव चुना था मणिकर्णिका .. शिव आप ही कहते हो ना मणिकर्णिका जीवन का अंतिम सत्य है .. हां आज हम वो महसूस कर रहे थे ...यहाँ बैठकर .. की प्रेम ईश्वर की साधना करने जैसा है जिसमें आप पूर्णरूप से अपने आप को समर्पित कर देते है.. प्रेम का अंतिम पड़ाव मैं की मृत्यू है.. और अश्रु वो गंगा है जिसमे इंसान अपने यादों की चिता विसर्जीत करता है ...और उसके साथ अपने मै को भी .. शिव हम जा रहे यहां से याद है शिव हम आपसे कहा करते थे आप इतने दूर क्यूं हो ..देखो ना हम आज आपके शहर में होकर भी आपसे कितने दूर हैं .. जानते हो शिव हम अपने साथ आपके शहर में बसने वाली आपकी खुशबू भी लेकर जा रहे ..मन में बस खयाल आया काश एक बार आपको भी देख लेते तो शायद आपका अक्स अपने आंखो में बसा कर लेकर जाते .. 

पागल है ना हम ..

शिव आपका शहर भी आपसा ही है बिलकुल बस जाने का मन करता है हमेशा के लिए.. आप और आपका बनारस साहिबा दोनों इश्क़ है ..

शिव हम कबका आप में विलीन हो चुके है हो सके तो किसी दिन विसर्जित कर देना शायद हमे

मुक्ति मिल जाए ..!!

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