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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Right and Wrong

 ‍‍‍सब कुछ कह लेने के बाद भी कुछ बातें दफ़्न रह जाती हैं, सीने के अंधेरे में... अकेलेपन की आदत भीड़ का हिस्सा होने नहीं देती..दुनिया चलती रहती है और हम वही कही ठहरे हुए है .. क्या सही क्या गलत के बीच में .. हम कभी तय नहीं कर पाए सही और गलत का फासला .. क्योंकी जो मेरे लिए सही था वो समाज के लिए गलत फिर .. बस हम ऐसे ही रुके रह गए इन फासलों में कही ..

हमसे कभी किसी ने कहा नहीं कि क्या ग़लत है और क्या सही.. और सब सही सीखने की होड़ में जब हम ग़लत हुए तो सबने हमपर ऊँगलियाँ उठायीं... जिंदगी के किसी गलत मोड़ पर हम कभी कभी बहुत अकेले हो गए, तब भी किसी ने हमे कांधे पर हाथ रखकर यह नहीं कहा , "सब सही होगा" ..जब की रिश्तों की इतनी भीड़ थी..एक उम्र के मोड़ पर जब हमने अपने गलत से सीखा तब सबने हमे अपनाया, हमे वो जगह दे दी गई , जिसके हक़दार थे हम ..फिर अगले कुछ मोड़ पर फिर कुछ गलत हुआ और सबने हमे छोड़ दिया..एक-एक करके गये सब, इनमे वो भी थे जो कभी हमारे जाने की बात पर रो पड़ते थे..इस सही और गलत ने हमे बहुत कुछ सीखा दिया अब हम सब कुछ जानते है  हार-जीत, उदासी, ग़म, वादा-कसमें, हँसी, तन्हाई... सब कुछ...! 

हां अब शायद हम चुप रहने लगे है .. समाज की चौखटे जो सही थी उनमें रहने लगे तो अब कोई कुछ नहीं कहता.. अब किसी मोड़ पर वो लोग भी मिलने लगे हैं जो हमे छोड़ गये थे और आश्चर्य तो ये है की वो अब यकीं दिलाना चाहते हैं कि वो अब भी हमारे साथ हैं तो हम बस हँस पड़ते है और आगे बढ़ जाते है..

उदासियों की रातों में हम अब भी अकेले अमावस के आसमान में सितारे तकते हुए, खुद से बातें करते है .. क्योंकि हम अब समझ चुके है बहुत पहले ही कि सफ़र में हमारे साथ सिर्फ हम ही है... ये जो काफिले लगे हुए है वो झूठे हैं ....थोड़ा सा गलत होने पर वो हमे फिर से किसी मोड़ पर छोड़ जाएंगे या उनका साथ छुट जाएगा हम गुनगुनाते है कोई धीमी ग़ज़ल और रात के साथ सुबह का इंतजार करते है ..

हमने सीख लिया है, कि जीने का कोई तरीका नहीं होता..हम अब ये भी अच्छे से जानते है की अकेलापन बेहतर है, बेवजह की भीड़ से..हम अब मुस्कुराकर आगे बढ़ जाते है भावुक बातों पर..क्योंकि हम किसी से नहीं कह सकते कि हमारी भावनायें अब निष्ठुरता में बदल चुकी हैं और हम अब बेफिक्र है, खुश है अकेलेपन में... 

जैसे वो अकेला चाँद आसमान में...!

Comments

  1. तुम्हारे शब्द... एहसास... अपनापन... प्रेम... और संवेदना !!! ��

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  2. आपने तो दिल की बात कह डाली...!..Really Osssm Writings ..😍👍

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