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मन की गाँठें

मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...

Corona .. Black Hole


 ‍‍‍‍‍‍‍‍‍कभी ‍सुना होगा..पढ़ा होगा.. और कभी उसे जानने के यत्न भी किए होंगे की अंतरिक्ष में एक ब्लैक होल नामक कुछ मौजूद होता है या बनता है..जो पूरी पृथ्वी को एक बार मे ख़त्म कर सकता है..हां मैने भी ऐसे ही कुछ पढ़ा था की वो ऐसी गुरत्वाकर्षण शक्ति है जो सब कुछ अपने और आकर्षित कर लेती है मैं आज आपसे कोरोना नामक ब्लैक होल की बात करना चाहतीं हू...जो इन दिनों अचानक से उत्पन हुआ है और जैसे सब कुछ अपने चपेट में लेना चाहता हो ..हां  वो पृथ्वी पर ही मौजूद है और दुनिया का लगभग हर चौथा पांचवा इंसान इस ब्लैक होल के अंदर फँसता हुआ जा रहा है या गिरने वाला मुमकिन है आप भी..!!

ये ब्लैक होल यूँही नहीं  बना हमने ही इसे खुद बनाया है अपनी लापरवाही से .. क्यों हम इतने निडर बन गए इसे लेकर .. ये कभी सोचना .. हमे ना सब बातों की जैसे जल्दी होती है .. थोड़ी ढील क्या हुए बस हम हो गए लापरवाह .. नही ये वक्त वैसे किसी को दोष देने का नही है .. सबने इस ब्लैक होल में कुछ ना कुछ खोया है ..परिवार चीखता है, दोस्त चिल्लाते है.. अबे..! ये इतना अच्छा था ,इतनी अच्छी थी.. कल ही तो फोटो देखा था कल ही तो इसकी पोस्ट पढ़ा था ..अभी कुछ दिन पहले तो मुझसे बात हुई थी ... ये क्या हो गया सब बातें व्यक्ति के जाने के बाद होती है..अब बस सबकी मदद करने का वक्त है ना की किसी राजनैतिक पार्टी के लिए , धर्म के लिए लड़ने का वक्त है ..हमे इसके लिए मिलकर काम करना होगा और इस ब्लैक होल में फंसे लोगों को उम्मीद की रौशनी दिखाकर बाहर लाना होगा..

सिर्फ़ जिंदगी को जीना नहीं जिंदगी को बचाना भी हमारा मक़सद होना चाहिए" जिंदगी की भोर धीमे होती है पर उसे ढलने में समय नहीं लगता.. 

खयाल रखिए अपना और अपनों का ..!!

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