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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

पूरानी डायरी के कुछ पन्ने ..

 आज पुरानी डायरी के कुछ पन्ने मिले जानते हो शिव कुछ भी नही बदला ..जिनपर कभी अपना प्रेम उतारा था शब्दों के रूप में ..वो जज़्बात वो एहसास सब कुछ आज भी उन पन्नों पर वही कही ठहरे हुए है ..! आज ये तारीख और उस कल की तारीख में बदला है तो बस तुम और तुम्हारा प्रेम .. और छूटा हुआ उंगलियों का साथ मेरी कलम से ..ना जाने क्यूँ ! एक बार फिर से मैं, उस एहसास से भर जाना चाहती हूँ, जब मेरे अंदर पहली बार तुम्हे को चाहने की बात उग आई थी.. मैं फिर से उन्हीं पलों में वापस लौट जाना चाहती हूँ जब तुम मेरे पास थे मैं फिर से उस एहसास को छूना चाहती हूँ .. जानती हूं यह छूना अपने मन के उस कोने को छूने जैसा होगा जहां तुम और तुम्हारी यादे है.. पानी की तरह ऊपर से शांत और अंदर से कई सारे तरंग लिए जैसे किसी की छुवन का इंतजार लिए ..सब अपने अंदर रख लेता हो .. मन भी तो बस पानी की तरह है .. इंतजार होता है बस किसी एहसास या किसी यादों का आने का .. और जैसे ही किसी याद ने छू लिया पूरी तरह से उस से भर जाता है .. ! सोचती हूं क्या तुम्हारे मन के किसी कोने में आज भी मेरी कोई याद है घर किए हुए ? नही शायद इसीलिए तो कभी तुमने एक बार भी हमे पुकारा नही या किसी भी तरह पास आने की कोशिश की .. बुरी हूं ना बहुत शिव मैं.. 

 शिव पर अब देखो ना ये मन तुम्हारी यादों की तरंगों से फिर से भर गया है .. हां बस ये बस मेरे मन पर अंकित होकर मुझमें ही समा जाएँगे... जैसे तुम आज भी मुझ में बसे हो .. ! शिव एक बार आकर खुद को हमसे ले जाना .. तुम्हें संभालते संभालते थक गए है अब हम .. आज भी वैसे ही जिद्दी है ...

तुम और तुम्हारी यादें भी...!!




Comments

  1. मै मेरी प्रेमिका राधिका का इंतजार बहुत कर रहा हुं। जब भी में आपका ब्लॉग पढ़ता हूं तो दिल रो पड़ता है,सांसे थम जाती है। उसकी यादों में आंसू रुकते ही नही। आखिर सच्चा प्यार होने के बावजूद भी प्रेमियों के बीच विरह क्यों आती है ?

    कितने सारे सवाल मेने अपने भगवान से किया !

    अपनी गलती सुधारने का मौका मांगता हूं भगवान से। बस एक बार मुझे उसे मिलना है। मै नही जनता वो किधर है।

    भगवान से यही दुआ है की सभी प्रेमियों की दुआ कबूल हो जाए !।💕❣️❤️♥️🥺

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  2. जानती नहीं हो क्या अर्चना

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