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मन की गाँठें

मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...

यूंही

हम चाहते है न हमारे अपने जो हमें समझे, जिसके सामने हम पूरी तरह खुल सके। लेकिन कोई कितना ही अपना क्यों न हो, भावनाओं में बहकर कभी भी अपनी सारी बातें किसी से भी नहीं करनी चाहिए! अपनी पसंद, ना पसंद और ख़ासकर अपनी कमज़ोरियां कहीं ज़ाहिर नहीं करनी चाहिए!


चाहे प्रेम हो, चाहे दुःख हो या चाहे ख़ुशी के लम्हें.. ज़्यादातर इंसान यकायक से जो कुछ भी मिल जाए उसे हज़म नहीं कर पाता और किसी न किसी ऐसे साथी की तलाश में रहता है जिससे वोह अपनी सारी बातें कह सके! महज़ भ्रम है, मायाजाल है ऐसी तलाश!.. इक बेवकूफी से अधिक कुछ नहीं!


किसी के भी सामने सोच समझकर खुलना चाहिए! एक ईश्वर के सामने ही पारदर्शिता रखनी चाहिए। वहीं आपके गुनाह, गलतियां समेत आपका स्वीकार कर सकते है और सही मार्ग भी बतला सकते है!


बाकी सब जो आपको जानते हो वो आपकी वहीं रग पकड़ेंगे जो पहले से ही कमज़ोर हो! उन्हीं ज़ख्मों को कुरेदकर रख देंगे! जिन ज़ख्मों को आप मरहम की आस में दिखायेंगे! जिसकी टीस उम्र भर नहीं जायेंगी! भावनाएं सबके अंदर होती हैं। जिसका हद में बहना ही उचित है!


ना सुनामी, ना दरिया का पानी !...

सबसे ख़तरनाक बहाव भावनाओं का है।

जिस में सब बिना तैरना सीखें निरंतर बहते जाते है!

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