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मन की गाँठें

मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...

Emotions of Daughters

Daughters

एक घर की चार दीवारों में,

बंधी रही वो बेटी अनगिनत सवालों में..

पिता के घर में पिता और भाई की मर्जी से,

ढलती रही वो उनकी खुशियों की खातिर..


पति के घर में पति की आवाज़ से,

चलती रही वो उनकी राहों पर...

कभी ना पूछा गया, "तुम क्या चाहती हो?",

उसकी खुद की ख्वाहिशें रह गईं अधूरी..


उसके अपने सपने, उसकी अपनी उम्मीदें,

दब गईं उसके अपने ही घर की चाहतों में..

क्या वो नहीं चाहती थी उड़ान भरना?

क्या वो नहीं चाहती थी अपनी पहचान बनाना?

आज भी वो पूछती है खुद से,

क्या मेरी भी कोई ख्वाहिश हो सकती है?

क्या मेरी भी कोई आवाज़ हो सकती है?

क्या मैं भी अपने लिए जी सकती हूँ?


ये ब्लॉग उन सभी लड़कियों के लिए है,

जिन्होंने कभी नहीं पूछा, "मैं क्या चाहती हूँ?"

उनकी अनसुनी ख्वाहिशों को समर्पित,

एक कदम उनकी आवाज़ बनने की ओर..

मुझे आशा है कि यह ब्लॉग उन सभी लड़कियों की भावनाओं को व्यक्त करता है जिन्हें कभी नहीं पूछा गया कि वे क्या चाहती हैं। यह उनकी आवाज़ को बुलंद करने का एक प्रयास है..!

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