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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Dreams

 ‍मैं हमेशा डॉक्टर बनाना चाहती थी अपने पापा की तरह क्योंकि पापा मेरे आदर्श थे , पर शायद उन्हें मेरा उनके जैसा बनाना कभी मंजूर नहीं था क्योंकि मैं लड़की थी ..फिर तो मेरे पास बनने के लिए कुछ नही था ? दिशाहीन सी मैं हमेशा खुद को तलाशती रही कभी ये बनी तो कभी ये मजे की बात ये है कि मैं कभी डॉक्टर नहीं बन पाई ...

और तब से एक सवाल ने  मेरा पीछा कभी नहीं छोड़ा अगर डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बन सकता है तो डॉक्टर की बेटी डॉक्टर क्यों नहीं बन पाती ..!! 

Hmm अब वक्त बदल चुका है पर सोचती ये थोड़ा पहले बदलता तो ? क्या मैं आज डॉक्टर होती ??  फिर एक बस नया सवाल है ...!! 


 हमेशा हमारी नाकामयाबियों का ठीकरा वक्त पर फोड देते है .. और कामयाबी ? कामयाबी हमारे मेहनत का फल होता है ! वक़्त तो हमेशा अपनी जगह था हमे बाद हमारे फैसले बदलने थे !


एक चराग़ और एक किताब और एक उम्मीद असासा

उस के बा'द तो जो कुछ है वो सब अफ़्साना है ...!!

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