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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Ayaushya....

आयुष्य म्हणजे कॉफीसारखे आहे.आणि  करियरचे चढते आलेख, हे ऐश्वर्य, हि मोठ मोठी घरे, या गाड्या, म्हणजे हा कप आहे. जो फक्त आयुष्याला चांगले कोंदन देण्याचा प्रयत्न करतो. पण आपण सगळे हा कप सुंदर करायच्या नादात कॉफीची मजा घ्यायला विसरतो आहोत. कॉफीची चव ही कपावर अवलंबुन नसते.”
“हे यशस्वी करियर, हे ऐश्वर्य म्हणजे आयुष्य नव्हे, या गोष्टी जरुर मिळवा, यशस्वी होण्याची महत्वाकांक्षा जरुर ठेवा. पण त्याच बरोबर, फक्त याच सर्व गोष्टी म्हणजे आयुष्य असा गैरसमज करुन घेउ नका.
हातातला कप जास्तीत जास्त सुंदर करायच्या प्रयत्नात खर्‍या आयुष्याची चव आणि गोडी चाखायला तर आपण विसरत नाही ना याकडे पण लक्ष द्या.

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