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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Evening...

मुझे अक्सर ढलती शाम को देखना पसंद है । ये शामे मेरे हमेशा करीब रही है । कभी उदासी तो कभी गुलाल बिखेर देती शाम .. शाम जिसे सुनके सब उससे कहते ये तो उदासी का पूरक है,मतलब ढलता हुआ सूरज ढलता हुआ दिन,पर जिंदगी को देखने का उसका अपना ही नजरिया है,

कभी कभी मुझे लगता है शाम उदासी का नहीं बल्कि शक्ति का पूरक है,जो सूरज पूरा दिन अपनी ऊर्जा से लोगों के जीवन को रोशन करता है,उस उगते हुए सूरज की प्रशंसा सब करते हैं। पर उस ढलते सूरज का साथ देने की शक्ति सिर्फ शाम में होती है,जो उस उदास थके हारे सूरज  को बाँहें फैला कर अपने आगोश में भर लेती है,और नई ऊर्जा से भर देती है कि वो आने वाली सुबह में फिर चमक सके और तेज, 

शाम वो है जिसकी गोद में सर रख के सूरज भी सुकून पाता है,वो वक़्त जो दिन और रात को मिलाने में सहभागी है,और जिसे पवित्र समय माना जाता है भगवान की आरती और अजान पढ़ी जाती है,तो शाम उदासी का पूरक कैसे हो सकती है....!!

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