Skip to main content

Featured

मन की गाँठें

मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...

Intezar..

मुझे इंतज़ार करना अच्छा लगता है तुम्हारा, तुम्हारे फ़ोन का, तुम्हारी एक झलक पाने के लिए हम चाहते है की दिन की पहली सेल्फ़ी भेजो, जिसमें तुम अलसाए से दिखते हो और जिसे देख कर मेरी सुबहें ख़ुशनुमा सी हो जाए
मुझे इंतज़ार रहता है, तुम्हारे पहले मैसेज का जिसमें आँखों में दिल उगाए एक स्माइली रहता है, जो कभी दोपहर तो कभी शाम को मेरा 'गुड मॉर्निंग' लाता है।

मुझे इंतज़ार रहता है उस पहली आवाज़ का जो कभी शाम, तो कभी दिन ढले आती है, जब मीलों दूर बैठे तुम छू लेते हो।
और तुम्हारी आवाज़ का एक टुकड़ा हवा में नहीं खोता वो वहीं, कानों के आस-पास गर्दन पर शायद रह जाता है।

ये मेरा इंतज़ार सिर्फ़ मेरा है। इसके हर लम्हें पर सिर्फ़ मेरा हक़ है। इन लम्हों में जो तुम होते हो वो सिर्फ़ मेरे होते हो।
इन इंतज़ार के पलों में तुम,तुम नहीं होते तुम वो होते हो, जिसे मैं बनाती हूँ, अपने इंतज़ार से, अपने इश्क़ से,अपनी कल्पनाओं से!


Comments

Popular Posts