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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

That raining day.... ❤️❤️

वो बारिश का दिन, और आपका घर पर आना,फिर
आपकी गर्म सांसों की सरगोशियों
से मेरा थोड़ा बहक जाना धीरे धीरे सांसों सा आपका वो करीब आना आपके चुंबनों के बरसात से लबरेज़ में, फ़िर मेरा आपमें डूब जाना आपका वो मेरे जिस्म के हर उभार पर थोड़ा सा ठहर कर, बहक जाना,
बहके हुए आप भी थे आपकी सांसों से महकी हुई मै भी थी  बिस्तर के हर सिलवटों में गिरफ्त आप भी थे और, मैं भी थी की वो सांस की आवाजाही थी
सबकुछ रफ़्तार में था, पर वक़्त कुछ ठहरा हुआ था
बरसता की बूंदों का शोर था कानों में हमारे
मगर हर तरफ खामोशियों का घना पहरा था
..
आपकी पसीने की शबनम की हर बूंद से
मेरा रोम रोम महक गया था
खरोंचा था मैंने आपको पुरजोर से भींच लिया उस छोर में कि यूँ भीग कर आपकी सांसों में
मै दहक गई थी ...
..
वो बारिश का दिन, और
आपका मेरे घर पर मेरा आना,एक सपना ही तो है जिसे मैंने खुली आंखों से महसूस किया है ...!!

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