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मन की गाँठें

मन की गाँठें रस्सी की गाँठों जैसी नहीं होतीं कि उन्हें हाथों से पकड़कर खोल लिया जाए। वे दिखाई भी नहीं देतीं, फिर भी उनका बोझ कंधों पर रखा किसी अदृश्य पत्थर की तरह हर समय हमारे साथ चलता रहता है। ये गाँठें अचानक नहीं बनतीं। इन्हें बनने में वर्षों लग जाते हैं। कभी किसी अधूरे संवाद से, जब हम बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन चुप रह गए। कभी किसी टूटे हुए विश्वास से, जब किसी अपने ने वही किया जिसकी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। कभी किसी बिछड़न से, जो बाहर से साधारण दिखती है लेकिन भीतर किसी पूरे संसार को उजाड़ देती है। और कभी उन भावनाओं से जिन्हें हम व्यक्त नहीं कर पाते, क्योंकि हमें डर होता है कि कहीं हमारी संवेदनशीलता हमारी कमजोरी न समझ ली जाए। समय के बारे में कहा जाता है कि वह हर घाव भर देता है। शायद यह पूरी तरह सच नहीं है। समय कई बार घावों को भरता नहीं, बस उनके ऊपर धूल जमा देता है। हम जीना सीख लेते हैं। हम मुस्कुराना सीख लेते हैं। हम लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं, यात्राएँ करते हैं, नई कहानियाँ लिखते हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता है। इतना सामान्य कि दुनिया को लगता है कि हम पूरी तरह ठीक हैं। ले...

One Dream

सुनो ,


तुम्हारा युं अचानक से मेरी जिंदगी में आना 

मन में एक तूफ़ान सा लाया है ...मन की ये बैचैनी कैसे बया करे समझ नहीं पा रहे .. इसीलिए चुप से हो गए है ..


जिंदगी का एक ख़्वाब जो हमने शायद  

"होल्ड" पर रख दिया था ... देखो ना वो रूठ सा एक कोने में पड़ा था..उसे फिर से देखने के लिए मजबुर कर दिया है तुमने..एक सफ़र का वो रास्ता उसके ना जाने कितने मोड़ है उनको तुमने अपनी तरफ़ मोड़ लिया है ...

अब हमे इंतज़ार है कब हम उस मोड़ से उस रास्ते पर चलना शुरू करे जिसकी मंज़िल 


"तुम" हो ...!!


शिव अब उस ख़्वाब को मैंने दफन कर दिया है क्यूंकि तुमने अपना रास्ता और मंजिल दोनों ही बदल दिए.. और मै वहीं ठहरी हुई हूं आज भी इंतजार में .. : ) 

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