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Writing

 मैंने अब धीरे-धीरे सीख लिया है या यूं कहूँ की कोई सिखा कर गया ..कि ज़िंदगी हर किसी को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लेने का नाम नहीं,बल्कि वक़्त आने पर मुस्कुराकर रुख़्सत कर देने का हुनर है..पहले मैं बहुत रोकती थी लोगों को भी,रिश्तों को भी,यहाँ तक कि उन लम्हों को भी जो मेरी उँगलियों से फिसल चुके थे..फिर एक दिन समझ आया,मोहब्बत का मतलब किसी को थामे रखना नहीं, बल्कि उसके हिस्से की आज़ादी को भी उतनी ही शिद्दत से चाहना है अब जो चला जाता है, उसे बद्दुआ नहीं देती, सिर्फ़ अपनी दुआओँ से आहिस्ता-आहिस्ता विदा कर देती हूँ हाँ, दर्द अब भी होता है, आँखें आज भी भर आती हैं,मगर मैंने अपने आँसुओं से भी कह दिया है हर बिछड़ना मातम नहीं होता..मैंने सीखा है...कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने नहीं, हमें बदलने आते हैं... और जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो उन्हें रोक लेना अपने ही हिस्से की रौशनी से इंकार करना होता है..अब मैं जाने देने से नहीं डरती...क्योंकि मुझे यक़ीन है जो मेरी नसीब में लिखा है,वो मुझसे कभी जुदा नहीं होगा बाक़ी सब... वक़्त की अमानत है, और अमानतें एक दिन लौटा दी जाती हैं.. हमे भी वक्त को सब...

Promises ❤️

सुनो शिव,


प्रतीक्षा है मुझे उस मिलन की,उस सुखद अनुभव की..जिस दिन मै तुममें विलीन हो जाऊंगी .. विश्वास है मन में कभी तो आएगा वो दिन,कि जी सकूंगी मैं अपने इस प्रतिक्षार्थ प्रेम को..

जो बस गया है हृदय में तुम्हारे लिए.. !

शायद किसी जन्म में मिल जाओ मुझे मेरे सूखे कण्ठ के अमृत बनकर,मेरे हृदय के आराध्य बनकर.!!


क्यूंकि आसान नहीं है मिलना..

क्योंकि साधारण नहीं है यह प्रेम ..!! 

शिव ,

मै सदैव रहूंगी तुम्हारे प्रेम में 

प्रेम के सात मौसम थामे 

तुम बस चले आना साथ मेरे 

मेरे निशा पर अपने नक्श बनाते हुए ..



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